साल 1954 में हीरो बनने का सपना लेकर मुंबई पहुंचा एक लड़का, जो स्क्रीन टेस्ट में रिजेक्ट कर दिया गया था. लेकिन उसने हार नहीं मानी और 16 साल थिएटर में काम करने के बाद फिल्मों में कदम रखा, बल्कि अपनी एक अलग पहचान और नाम भी बनाया.
पृथ्वी थिएटर की सीढ़ियों पर उदास बैठा ये शख्स बना बॉलीवुड का सबसे बड़ा विलेन, पिता के रोल में थिएटर्स में बेटियों की कर दीं आंखें नम
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