आइज़नकोट की नीतियों को लेकर भी फ़लीस्तीन समर्थक हलकों में सवाल उठते रहे हैं. फिर सवाल ये है कि अरब राजनीतिक दलों ने इसराइल में सरकार बनाने के लिए उनका समर्थन क्यों किया?
फ़लस्तीन पर एक जैसा रुख़, लेकिन नेतन्याहू की जगह आइजनकोट क्यों बने अरब पार्टियों की पसंद
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