झारखंड की आदिवासी नेत्री निशा भगत के निधन के बाद उनके संघर्षमय जीवन की चर्चा हो रही है. होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई के बाद उन्होंने बेंगलुरु की नौकरी छोड़ आदिवासी अधिकारों, सरना धर्म कोड, जल-जंगल-जमीन और संस्कृति संरक्षण के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई थी.
कौन थीं आदिवासी नेत्री निशा भगत? बेंगलुरु की नौकरी छोड़ जल-जंगल-जमीन और सरना धर्म कोड की लड़ाई में उतरीं, गुमला से लड़ा था चुनाव
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