राहुल गांधी के "ये शिव की बारात है, इसमें कोई भी आ सकता है" बयान को विपक्षी एकजुटता के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि उन्होंने इंडिया गठबंधन के भीतर मतभेदों और नए सहयोगियों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच यह संकेत दिया कि सरकार विरोधी आंदोलन में शामिल होने के लिए किसी को विशेष निमंत्रण की जरूरत नहीं है.
ये शिव की बारात है,इसमें कोई भी आ सकता है, ये राहुल गांधी का बयान है या आमंत्रण?
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