ग्लोबल टाइम्स आगे लिखता है कि वाशिंगटन अपने "रणनीतिक साझेदारों" को उनकी उपयोगिता के आधार पर आंकता है. जब उसे इंडो-पैसिफिक में भारत का साथ चाहिए होता है, तो वह उसे अपना साझेदार कहता है; लेकिन जब उसे अपने उद्योगों को बचाना होता है, तो वह बेझिझक टैरिफ का हथियार इस्तेमाल कर लेता है.
ये कैसे स्ट्रेटजिक पार्टनर... भारत-अमेरिका संबंधों पर चीन की है पूरी नजर
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