Munshi Premchand Business: सोचिए, एक ऐसा आदमी जिसके सामने सुरक्षित सरकारी नौकरी थी, परिवार था, बच्चों की जिम्मेदारी थी और आगे आराम की जिंदगी थी... लेकिन उसने सब छोड़ दिया. महात्मा गांधी का एक आह्वान और प्रेमचंद सरकारी मुलाजिम से स्वरोजगार की ओर बढ़ गए.
सरकारी नौकरी छोड़कर मुंशी प्रेमचंद ने गोरखपुर में खोला था कपड़े का कारखाना, चरखे लगाए, करघे चलाए... फिर क्यों बंद करना पड़ा कारोबार?
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