CB-CID की जांच में सामने आया कि थानाध्यक्ष विद्यासागर त्रिपाठी और उनकी पूरी टीम ने अपने फायदे और निर्दोषों की छवि खराब करने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए और झूठी चार्जशीट कोर्ट में पेश की.
प्लॉट मुफ्त में नहीं मिलने पर थाना प्रभारी ने 12 लोगों को भेजा था जेल, 36 साल बाद CB-CID ने दर्ज किया मुकदमा
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