महाराष्ट्र के विदर्भ की रहने वाली सुनीता अंबादास चाफले ने पति की मौत के बाद हार नहीं मानी. उन्होंने पति की पारंपरिक खेती को छोड़कर जैविक खेती को अपनाया. वो देसी बीजों का बैंक भी चलाती हैं. इस तरह वो अपने मायके और ससुराल दोनों का सहारा बनी हैं.
पति की मौत के बाद भी नहीं मानी हार, देसी बीजों और जैविक खेती ने दिलाई पहचान और पैसा
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