नाना कलाकार थे, 'स्टार' नहीं. 'स्टार' होना कला की हत्या कर देना है. जबकि कलाकार होना सर्जक (Creator) होना है, जो देश और समाज के मूल्यों और सरोकारों के साथ बनता-बढ़ता है.
नाना जब बोलते थे तब खामोशी छा जाती थी, और जब चुप रहते थे तो कोलाहल मच जाता था
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