प्ररेणा ने कहा, 'होमस्टे में मुझे सिर्फ़ सोने के लिए बिस्तर ही नहीं मिला, बल्कि घर का बना खाना, लोगों से दिल खोलकर बातचीत और लद्दाखी संस्कृति को करीब से जानने का मौका भी मिला. किसी जगह पर सिर्फ़ घूमने जाना और वहां सच में कुछ समय तक रहना - इन दोनों में बहुत फ़र्क होता है.'
कॉर्पोरेट छोड़ लद्दाख घूमने गई महिला को भा गया स्टोक गांव, बोलीं- 'सच्चाई जाने बिना आई थी, अब जाने का मन नहीं'
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