'सड़क' का अगला कदम सिर्फ लोगों की व्यक्तिगत शिकायतों से कहीं आगे का हो सकता है. पार्थ का मानना है कि आम जनता की तरफ से आने वाली हजारों रिपोर्ट मिलकर यह साफ दिखा सकती हैं कि सड़कों की हालत कहां सबसे ज्यादा खराब है, कौन से गड्ढे बेहद खतरनाक हैं और कौन सी शिकायतें सबसे ज्यादा वक्त से पेंडिंग हैं.
दिल्ली के गड्डों से लेकर फिजी तक: कैसे एक 16 साल के लड़के ने सड़कें ठीक करने के लिए बनाया AI प्लेटफॉर्म
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