डॉ. साहू कहते हैं कि जमीनी स्तर पर चाय उत्पादकों और स्थानीय लोगों से हुई बातचीत में भी मौसम में बदलाव, चाय उगाने की परिस्थितियों में बदलाव और घटती पैदावार को लेकर चिंता सामने आई. ये बातें शोध के निष्कर्षों से जुड़ती हैं और बदलते मौसम के हिसाब से चाय बागानों में बदलाव करने की जरूरत है.
चाय की प्याली पर क्लाइमेट चेंज का अटैक: फीकी होती दार्जिलिंग की कड़क चाय
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