ईरान के लिए सबसे बड़ा सबक यही है कि कूटनीतिक बयानों के साथ-साथ देशों के वास्तविक कदमों को भी ध्यान में रखा जाए. हाथ मिलाना और शांति की बात करना पर्याप्त नहीं है. यह देखना भी जरूरी है कि संकट के समय कौन किसके साथ खड़ा है.
अमन की बातें, जंग की तैयारी: ईरान के खिलाफ पाकिस्तान का दोहरा खेल
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